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देख तिरिया के चाले, सिर मुंडा मुंह काले, देख मर्दों की फेरी, मां तेरी कि मेरी

कोई चालाक औरत बीमारी का बहाना करके लेट गई और अपने पति से बोली कि जब तक तुम अपनी माँ को सिर मुड़ाकर गधे पर सवार कराके नहीं लाओगे तब तक मैं ठीक नहीं हो सकती। पति भी बड़ा होशियार था। वह अपनी ससुराल पहुंचा और सास से बोला कि तुम्हारी लड़की बहुत बीमार है। अब अगर तुम सिर मुड़ाकर और गधे पर सवार होकर उसके सामने पहुंचो तभी वह अच्छी हो सकती है। माँ बेचारी सीधी-सादी थी। लड़की की ख़ातिर वह ऐसा करने को तैयार हो गई। जब वह उसके दरवाज़े पर आई तो लड़की इस हालत में अपनी माँ को नहीं पहचान पाई और उसे अपनी सास समझ कर मन ही मन बहुत प्रसन्न हुई कि उसकी चालाकी काम कर गई. उसने कहा – देख तिरिया के चाले, सिर मुंडा मुंह काले। किंतु जब जवाब में उसके पति ने दूसरी आधी पंक्ति कही, तो वह खिसिया कर रह गई।
कहावत का अर्थ है कि स्त्री अगर चालाक होती है तो पुरुष भी उससे कम नहीं।

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