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चलत फिरत धन पाइए, बैठे पावे कौन

किसी गाँव में एक धनाढ्य व्यक्ति रहता था. उसके पास अच्छी खासी जमीन थी और बहुत सी गायें भी थीं पर वह न तो खेती पर ध्यान देता था और न ही अपनी गायों पर. उस के पास धन की हमेशा तंगी रहती थी और उसका स्वास्थ्य भी खराब रहता था. एक बार उसके गाँव में एक महात्मा जी आए. वह उनके पास अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई उपाय पूछने पहुँचा. महात्मा जी ने उसे बताया कि सुबह मुँह अँधेरे स्वर्ग से एक हंस इस धरती पर आता है. जो कोई उस हंस को एक बार देख लेता है उस के जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता.

दूसरे दिन पौ फटने से पहले ही वह व्यक्ति उठ कर उस हंस की तलाश में निकल पड़ा. गोशाला की ओर गया तो देखा कि ग्वाला गाय का दूध दुह कर अपने घर ले जा रहा है. मालिक को देख कर वह हड़बड़ा गया और क्षमा मांगने लगा. खलिहान के पास से निकला तो देखा कि उसका पुराना विश्वसनीय सेवक बोरी में अनाज भर रहा है. वह भी सिटपिटा गया और माफ़ी मांगने लगा. पूरे सप्ताह वह हंस की तलाश में घूमता रहा और जहाँ भी वह गया वहाँ कुछ न कुछ गड़बड़ी होती मिली. उसको अपने स्वास्थ्य में भी बहुत परिवर्तन महसूस हुआ. वह फिर उन महात्मा से मिलने गया और उन्हें बताया कि हंस तो उसे नहीं मिला पर हंस की खोज में जाने से लाभ बहुत हुआ. महात्मा जी ने कहा कि वत्स! हंस तो तुम्हें मिल गया. परिश्रम ही वह हंस है.

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