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यही तो बीमारी थी

एक बार अकाल पड़ा तो गाँव में रहने वाला एक गरीब किन्तु चालाक बनिया पास के शहर में गया और एक विधुर सेठ के साथ अपनी लड़की का विवाह करना तय करके उससे पांच हजार रुपये ले आया। विवाह के लिए निश्चित तिथि के दिन उसने अपने घर में बहुत ऊंचा झंडा लगवा दिया। सेठ की बारात उसी को लक्ष्य करके उस घर की ओर बढने लगी.
लेकिन बनिये के तो कोई लड़की थी ही नही। इसलिए उस के घर वालों ने एक कुतिया को मार कर उसकी अर्थी बांधी और उसे कंधों पर उठा कर बारात के सामने चले। बारात वालों के पूछने पर उन्होंने गहरा दुःख प्रकट करते हुए कहा कि जिस लड़की की शादी होनी थी, वह अचानक मर गई।
इस बात को सुन कर वे सब सकते में आ गये। लेकिन अर्थी जल्दी में बांधी गई थी, इसलिए कुतिया की पूंछ नीचे की ओर लटकती रह गई थी। बरातियों में से किसी ने पूछ लिया, यह क्या है ? बनिये ने प्रत्युत्पन्न मति का परिचय देते हुए तत्काल ही उत्तर दिया कि यही तो बीमारी थी। कल अचानक लड़की के पूँछ निकल आई, जिससे वह इतनी जल्दी मर गई। इस पर प्रौढ़ दूल्हा मन मार कर बरात सहित अपने घर की ओर लोट पड़ा।

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