Uncategorized

  1. ढंग से करो तो गेंडे को भी गुदगुदी होती है.गेंडे की खाल इतनी मोटी होती है कि उसे गुदगुदी होना असंभव सी बात है, लेकिन युक्ति पूर्वक करने से उसे भी गुदगुदी हो सकती है. कहावत में हास्य का सहारा ले कर यह बताया गया है कि प्रयास करने पर कठोर हृदय और नीरस व्यक्तियों की भावनाओं को भी जगाया जा सकता है. ऐसे भी कह सकते हैं कि प्रयास करने पर कंजूस आदमी से भी चंदा लिया जा सकता है.
  2. ढका हुआ ना उघाड़ बहू घर तेरा ही है.सास बहू को सीख दे रही है की घर की बदनामी वाली कोई बात मत उघाड़ो. अब यह घर तुम्हारा ही है.
  3. ढपोर शंख.ढपोर शंख की कथा कही जाती है कि उस से कोई एक चीज़ मांगो तो वह कहता था कि मैं तुम्हें दो दूँगा, पर देता कुछ नहीं था. आजकल के बहुत से नेता भी ऐसे ही हैं. (देना लेना कुछ नहीं हामी भरूं करोड़).
  4. ढाई आखर प्रेम को पढ़े सो पंडित होय(पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय). जिसने मनुष्य मात्र के प्रति प्रेम का भाव जगा लिया वही सच्चा पंडित है.
  5. ढाई दिन की बादशाहत.यह कहावत अलिफ़ लैला के किस्सों के किसी किरदार पर आधारित है जिसे ढाई दिन की बादशाहत मिली थी. कोई छोटी मानसिकता वाला व्यक्ति थोड़े समय के लिए कोई महत्वपूर्ण पद मिल जाने पर इतराए तो लोग यह बोल कर उसे उसकी हैसियत याद दिलाते हैं. मुगल बादशाह हुमायूं के समय में भी ऐसा एक किस्सा हुआ था जब हुमायूं ने डूबने से बचाने की एवज़ में एक भिश्ती को एक दिन की बादशाहत दी थी. उस भिश्ती ने चमड़े के सिक्के चलवा दिए थे.
  6. ढाक के वही तीन पात.ढाक के एक पत्ते में तीन पत्तियाँ होती हैं. आप कितना भी ढूँढिए सारे पेड़ में तीन पत्तियों की तिकड़ी ही मिलेंगी, किसी में चार या पांच पत्तियाँ नहीं मिलेंगी. काफ़ी प्रयास करने के बाद भी समस्या वहीँ की वहीँ रहे तो यह कहावत कही जाती है. 
  7. ढाक तले की फूहड़महुए तले की सुघड़.ढाक के पेड़ में न छाँव है न फल. उसके नीचे केवल मूर्ख स्त्री ही खड़ी होगी. महुए में छाँव भी है और फल भी इसलिए समझदार स्त्री उसी के नीचे खड़ी होगी.
  8. ढाल तलवार सिरहाने और चूतड़ बन्दीखाने.कायर व्यक्ति के लिए. ढाल तलवार दिखाने के लिए रखी हुई है और खुद युद्ध भूमि में जाने की बजाए बन्दीखाने में बैठे हैं.
  9. ढाल देख कर दौड़ने का मन करता है.यह एक मनुष्य की स्वभावगत कमजोरी है, जो कार्य आसानी से हो जाए उसे करने का सब का मन करता है.
  10. ढीलों का भाग्य भी ढीला. (राजस्थानी कहावत) जो लोग ढीले (अकर्मण्य) होते हैं, उनका भाग्य भी साथ नहीं देता.
  11. ढुलमुल बेंट कुदारी और हँस के बोले नारी.कुदाली की बेंट हिलती हुई हो और नारी हँस के बोले, इन दोनों से खतरा है.
  12. ढोर को क्या पता कि खेत रिश्तेदारों का है.जानवर को जहाँ मौका मिलता है वह किसी भी खेत में घुस कर फसल खाना शुरू कर देता है, फिर वह खेत चाहे उसके मालिक के रिश्तेदार का ही क्यों न हो. कोई नासमझ आदमी अनजाने में ही अपने किसी आदमी को नुकसान पहुँचाए तो.
  13. ढोर को समझाना आसान, मूर्ख को समझाना मुश्किल.एक बार को जानवर को समझाया जा सकता है पर मूर्ख व्यक्ति को समझाना बहुत कठिन है. (क्योंकि वह अपने को बहुत बुद्धिमान समझता है).
  14. ढोर मरे कूकुर हरषाय.जानवर के मरने पर कुत्ता खुश होता है क्योंकि उसे मांस हड्डी आदि मिलती है. किसी की विपत्ति में कोई दुष्ट व्यक्ति प्रसन्न हो या लाभ उठाए तो यह कहावत कही जाती है. 
  15. ढोल के भीतर पोल.ढोल देखने में कितना भी बड़ा हो अंदर से खोखला होता है. जब किसी चीज़ में आडम्बर बहुत हो पर वास्तविकता में वह कुछ भी न हो तो यह कहावत कही जाती है. 
  16. ढोल गले पड़ गया, बजाओ चाहे न बजाओ.कोई अनचाही जिम्मेदारी आ पड़ी है, अब यह आपके ऊपर है कि निभाएँ या मना कर दें.
  17. ढोल में पोल है, बजे जितना बजा लो. भरोसा नहीं कब फूट जाए, इसलिए जब तक हो सके मौके का फायदा उठालो.जहाँ कोई सरकारी ठेकेदार अफसरों से मिलीभगत कर के घटिया निर्माण करा रहा हो वहाँ यह कहावत कही जा सकती है. 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *