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कुआँ बेचा है कुएं का पानी नहीं बेचा

 माल बेचने के बाद बेइमानी करना. इस के पीछे एक कहानी कही जाती है. गाँव के एक ठाकुर ने किसी बनिए को अपना कुआँ बेचा. जब बनिया कुँए से पानी निकालने पहुँचा तो ठाकुर ने कहा कि मैंने तुम्हें कुआँ बेचा है कुएं का पानी नहीं बेचा है, पानी के लिए अलग से पैसा दो. विवाद बढ़ा तो बात पंचायत में पहुँची. सरपंच ने जब सारी कहानी सुनी तो उस की समझ में सारा माजरा आ गया. उसने बेईमान ठाकुर को सबक सिखाने के लिए फैसला दिया कि कुआँ बनिए का है और पानी ठाकुर का. ठाकुर को अपना पानी कुँए में रखने के लिए सौ रुपये रोज किराया बनिए को देना होगा.

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