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किसान चाहे वर्षा, कुम्हार चाहे सूखा

 एक महात्मा जी के दो बेटियाँ थीं. एक का विवाह किसान के साथ हुआ था और दूसरी का कुम्हार के साथ. एक बार वह अपनी बेटियों से मिलने के लिए निकले. पहले वह किसान परिवार से मिलने पहुँचे. समधी और दामाद ने उनका स्वागत किया लेकिन वे सभी वर्षा न होने से चिंतित थे. बेटी ने कहा – पिता जी आप भगवान से प्रार्थना कीजिए कि वे जल्दी ही वर्षा करें, नहीं तो हमें भूखे मरने की नौबत आ जाएगी. महात्माजी मन ही मन वर्षा के लिए प्रार्थना करते हुए दूसरी बेटी के घर पहुंचे. वहाँ बहुत सारे मिटटी के बर्तन भांडे धूप में सूख रहे थे. उन की बेटी ने प्रसन्न होते हुए बोली कि वर्षा न होने से उन्हें बहुत लाभ हुआ है. उस ने पिता से कहा कि वे भगवान से प्रार्थना करें कि अभी एकाध महीने और वर्षा न हो. कहावत का अर्थ है कि संसार में सभी व्यक्ति केवल अपना ही हित चाहते हैं.

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